राजस्थान में कृषि | Rajasthan me Krishi

राजस्थान में कृषि | Rajasthan Me Krishi | राजस्थान कृषि | राजस्थान कृषि के महत्वपूर्ण प्रश्न | राजस्थान कृषि इम्पोर्टेन्ट क्वेश्चन | Rajasthan Me Krishi | Rajasthan Krishi Most Important Question | राजस्थान में कृषि | राजस्थान में कृषि के प्रकार | राजस्थान में कृषि के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न

राजस्थान में कृषि

★ राजस्थान में देश का लगभग 11 प्रतिशत क्षेत्र कृषि योग्य भूमि है और राज्य में 50 प्रतिशत सकल सिंचित क्षेत्र है जबकि 30 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र है।

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★ राजस्थान का 60 प्रतिशत क्षेत्र मरूस्थल और 10 प्रतिशत क्षेत्र पर्वतीय है। अतः कृषि कार्य संपन्न नहीं हो पाता है और मरूस्थलीय भूमि में सिंचाई के साधनों का अभाव पाया जाता है। अधिकांश खेती राज्य में वर्षा पर निर्भर होने के कारण राज्य में कृषि को मानसून का जुआ कहा जाता है।

★ देश के जल संसाधनों का केवल 1% ही राजस्थान में है एवं उपलब्ध पानी का 83% सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।

★ राजस्थान के कुल सिंचित क्षेत्र में 70% कुओं और ट्यूब-कुओं के माध्यम से तथा 27% क्षेत्र नहरों के माध्यम से सिंचित होता है ।

★ राजस्थान का बाजरे के उत्पादन व क्षेत्रफल दोनों दृष्टि से देश में प्रथम स्थान है।

★ राजस्थान में इजराइल की सहायता से होहोबा (जोजोबा) की कृषि की जाती है। होहोबा के तीन फार्म ढण्ड (जयपुर), फतेहपुर (सीकर) [दोनों सरकारी] और झज्जर (बीकानेर) [निजी] हैं।

★ राजस्थान के कुल कृषिगत क्षेत्रफल का 2/3 भाग खरीफ के मौसम में बोया जाता है।

★ राजस्थान में सर्वाधिक खाया जाने वाला और सर्वाधिक उत्पन्न होने वाला खाद्यान्न गेहूं है।

★ राजस्थान में मुख्यतः दो प्रकार की फसलें होती हैं:

रबी की फसल :

☛ इस फसल को अक्टूबर–नवंबर में बोया जाता है और मार्च–अप्रैल में काट लिया जाता है।

☛ मुख्य फसल: गेहूं, राई, मटर, आलू, जौ, सरसों, चना ।

खरीफ की फसल :

☛ इस फसल को मई-जून में बोया जाता है और सितम्बर-अक्टूबर में काट लिया जाता है।

☛ मुख्य फसल: मक्का, अरहर, गन्ना, धान, तिलहन, बाजरा, ज्वार ।

राजस्थान में कृषि के प्रकार:

शुष्क कृषि:

☛ रेगिस्तानी भागों में जहां सिचाई का अभाव हो शुष्क कृषि की जाती है, इसमें भूमि में नमी का संरक्षण किया जाता है।

(a) फव्वारा पद्धति

(b) ड्रिप सिस्टम (इजराइल के सहयोग से)

सिंचित कृषि:

☛ गंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़, उदयपुर इत्यादि जिलों में सिचाई के साधन पूर्णतया उपलब्ध है यहाँ उन फसलों को बोया जाता है जिन्हें पानी की अधिक आवश्यकता होती है।

मिश्रित कृषि:

☛ जब कृषि के साथ-साथ पशुपालन किया जाए अथवा दो या दो से अधिक फसले एक साथ बोई जाये तो उसे मिश्रित कृषि कहा जाता है।

झुमिंग कृषिः

☛ इस प्रकार की कृषि में वृक्षों को जलाकर उसकी राख को खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है।

☛ राजस्थान में इस प्रकार की खेती को वालरा कहा जाता है।

☛ भील जनजाति द्वारा पहाडी क्षेत्रों में इसे “चिमाता” व मैदानी में “दजिया” कहा जाता है।

☛ राजस्थान में उदयपुर, डूंगरपुर, बांरा में वालरा कृषि की जाती है।

राजस्थान की फसलें :

★ राजस्थान में पैदावार के हिसाब से खाद्यान्न फसलें 57 प्रतिशत और नकदी/व्यापारिक फसलें 43 प्रतिशत होती हैं। यहाँ पर पैदा होने वाली प्रमुख फसलें और सर्वाधिक उत्पादक जिले तथा देश में राज्य का स्थान निम्न्नानुसार है:

राजस्थान में पैदा होने वाली प्रमुख फसलोकी मुख्य किस्म :

राजस्थान में पैदा होने वाले प्रमुख मसाले एवं उनके सर्वाधिक उत्पादक जिले :

☛ विश्व में मसाला उत्पादन में भारत प्रथम स्थान रखता है।

☛ भारत में राजस्थान मसाला उत्पादन में प्रथम है, किन्तु गरम मसालों के लिए केरल राज्य प्रथम स्थान पर है।

☛ केरल को भारत का स्पाइस पार्क भी कहा जाता है।

☛ राज्य में बांरा जिला राज्य में मसाला उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

☛ राजस्थान का प्रथम मसाला पार्क झालावाड़ में स्थित है।

☛ राजस्थान में दूसरा मसाला पार्क रामगंज मंडी (कोटा) में स्थापित किया जा रहा है।

☛ राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र वर्ष 2000 में तबीजी (अजमेर) में बनाया गया था।

राजस्थान में पैदा होने वाले प्रमुख फल एवं उनके सर्वाधिक उत्पादक जिले:

महत्वपूर्ण बिंदु:

☛ राजस्थान में सर्वाधिक गेहूं गंगानगर जिले में उत्पादित होता है, इसलिए गंगानगर जिले को ‘धान का कटोरा’ भी कहते है।

☛ जौ उत्पादन की दृष्टि से राज्य का देश में दूसरा स्थान हैं।

☛ गेहूं उत्पादन की दृष्टि से राज्य का देश में चौथा स्थान हैं।

☛ मक्का के उत्पादन मे राजस्थान का देश में आठवां स्थान है।

☛ लूणकरणसर मूंगफली उत्पादन के लिए ‘राजस्थान के राजकोट’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।

☛ भरतपुर जिले के सेवर नामक स्थान पर आठवीं पंचवर्षीय योजना में 20 अक्टूबर, 1993 को केन्द्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गई।

☛ केन्द्र सरकार द्वारा अखिल भारतीय समन्वित बाजरा सुधार परियोजना व मिलेट डायरेक्टोरेट को क्रमशः पूना व चैन्नई से जोधपुर व जयपुर स्थानांतरित किया गया है। दो नए केन्द्र बीकानेर एवं जोधपुर में स्थापित किए गए हैं।

☛ बांसवाड़ा जिले के बोरवर गाँव में कृषि अनुसंधान केन्द्र संचालित है। इस केन्द्र ने मक्का की संयुक्त किस्में माही कंचन एवं माही धवल विकसित की है।

☛ कृषि अनुसंधान केन्द्र बासवांडा ने चावंल की माही सुगंधा किस्म विकसित की है।

☛ राजस्थान में ज्वार अनुसंधान केन्द्र वल्लभनगर उदयपुर में स्थापित किया गया है।

☛ ग्वार का उत्पादन बढ़ाने हेतु राजस्थान में दुर्गापुरा (जयपुर) स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र उन्नत किस्में तैयार करता है।

सबसे बड़ी ग्वार मण्डी जोधपुर में स्थित है तथा ग्वार गम उद्योग भी जोधपुर में सर्वाधिक है।

☛ देश की पहली व एशिया की दूसरी सबसे बड़ी खजूर पौध प्रयोगशाला जोधपुर के चोपासनी में स्थापित की गई है।

☛ राजस्थान में जीरे की सबसे बड़ी मंडी भदवासिया (जोधपुर) में स्थित है।

☛ राजस्थान का देश में मूंगफली उत्पादन की दृष्टि से सातवां स्थान है।

☛ अरण्डी उत्पादन में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है जबकि प्रथम स्थान गुजरात का है।

☛ नागौर (ताउसर) पान मैथी (हरी मैथी) के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

☛ राजस्थान में मसालों के समग्र उत्पादन में कोटा जिला अग्रणी है।

☛ राजस्थान राज्य सहकारी तिलहन उत्पादन संघ लिमिटेड (तिलम संघ) की स्थापना 1990 में की गई।

☛ राजस्थान में प्रथम निजी क्षेत्र की कृषि मण्डी कैथून (कोटा) में ऑस्ट्रेलिया की ए.डब्लू.पी कंपनी द्वारा स्थापित की गई है।

☛ राजस्थान में सर्वाधिक गुलाब का उत्पादन पुष्कर (अजमेर) में होता है।

☛ राज्य में तीन कृषि निर्यात क्षेत्र जोधपुर (ग्वार, मेहन्दी, मोठ, मसालों हेतु), कोटा (धनिया तथा औषधीय महत्व के पौधों हेतु) तथा गंगानगर में रसदार फल हेतु स्थापित किए गए हैं।

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